Wednesday, 22 January 2020

दिल को स्वस्थ रखने का सबसे आसान उपाय - The easiest way to keep the heart healthy

*दिल को स्वस्थ रखने का सबसे आसान उपाय*
 इसमें तुलसी और पुदीने की पांच पांच पत्तियों को रोजाना सुबह के समय खाना है । जिससे ब्लड का पीएच लेवल सामान्य बना रहता है ,जिससे रक्त रक्त धमनियों में ब्लॉकेज नहीं बनते और हार्ट अटैक से बचाव होता है ।इस उपाय को रोजाना आजमाया जा सकता है।

नेत्र ज्योति सुरक्षा कवच - Eye protection shield

*नेत्र ज्योति सुरक्षा कवच*

प्रतिदिन नहाने से पूर्व पांव के अंगूठों में शुद्ध सरसों का तेल मलने से  वृद्धावस्था तक नेत्रों की ज्योति कमज़ोर नही होती।
 *यह अद्भुत प्रयोग यदि प्रतिदिन किया जाए तो चश्मा लगाने की आवश्यकता नही पड़ती*

रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक - Immunity boosters

*रोग प्रतिरोधक क्षमता वर्धक* 

आधा चम्मच दालचीनी पाउडर एवं एक चम्मच शहद के नियमित प्रयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है एवं यह साइनस और  तीव्र जुकाम में भी लाभदायक है।
उपयोग करें और लाभ उठाएं।

Few common sense HEALTH TIPS FOR All

Few common sense HEALTH TIPS FOR All*

*A. Two things to check often:*
(1) Your blood pressure
(2) Your blood sugar

*B. Three things reduced to minimum:*
(1) Salt
(2) Sugar
(3) Starch (Carbohydrates)

*C. Four things to increase:*
(1) Greens
(2) Veggies
(3) fruits
(4) Nuts

*D. Three things to forget:*
(1) Your age
(2) Your past
(3) Your grudges

*E. Three things to have:*
(1)True Friends
(2)Loving family
(3)Positive thoughts

*F. Four acts to stay healthy:*
(1) Fasting
(2) Laughing 
(3) Exercise
(4) Weight loss

*G. Four things not to wait for:*
(1) Don't wait till you are sleepy to sleep
(2) Don't wait till your tired to rest
(3) Don't wait till your friend is sick  to go to see him.
(4) Don’t wait for problems to pray to God.

*TAKE CARE OF YOURSELF.. & STAY YOUNG!!*

“A New Year, A New Start, and Miles to Go. Wish You all Successful and Glorious New Year 2020”
🙏

होठों का फटना व दर्द होना

*होठों का फटना व दर्द होना*

ठंड के मौसम में और ज्यादा गर्मियों में अक्सर हमारे होंठ फटने लगते हैं  जिससे दर्द भी होता है ।
इसका बेहद ही घरेलू उपाय आपको बतला रहा हूं ।अपनी नाभि में घी ,तेल अथवा कोई भी चिकना पदार्थ लगाएं। इससे होठों का फटना और उनका दर्द होना दूर हो जाएगा।

कैसी भी सर्दी ,जुखाम, वायरल बुखार के लिए अति उत्तम दवा है।

8 पत्ते पुदीना
8 पत्ते तुलसी
आधा चमच्च जीरा
आधा चमच्च दाना मेथी
4 काली मिर्च
4 लौंग
10 ग्राम अदरख कूटकर
पाव चमच्च हल्दी
थोड़ा दालचीनी पाउडर
2 तेजपत्ते
6 कड़वा नीम की पत्ती
थोड़ा सा देशी गुड़
इनसब को एक गिलास पानी में उबालें ढककर।
आधा रहने पर छान लें मसालें में से चमच्च से पूरा रस निकाल लें।
गरम गरम दिन में तीन बार लें।
अडूसे के पत्ते हों तो 8 पत्ते वो भी डाल लें।
कैसी भी सर्दी ,जुखाम, वायरल बुखार के लिए अति उत्तम दवा है।
स्वस्थ व्यक्ति भी ले सकता है।

खर्राटों की समस्या से मुक्ति

*खर्राटों की समस्या से मुक्ति*

 खर्राटों की समस्या से मुक्ति पाने के लिए बेहद सरल घरेलू उपाय प्रस्तुत है
सामग्री
 एक छोटी चम्मच हल्दी
एक चम्मच शहद व एक गिलास गुनगुना  जल
आधा चम्मच हल्दी  को गुनगुने जल में घोल देवें  और उसी में 1 बड़े चम्मच शहद मिला दे ,
 इसे सोते समय पी जावे  व सुबह उठने के बाद पुनः इसी प्रयोग को   दोहराएं।3 से 4 दिनों में खर्राटों की समस्या में लगभग 50% आराम मिलेगा और इस उपचार को तब तक करते रहे जब तक आप को पूरी तरह से खर्राटों से  निजात नहीं मिल जाती ।

सुगर यदि कंट्रोल में न रहे तो

*सुगर यदि कंट्रोल में न रहे तो*

सबसे पहले वॉक कम से कम आधा घण्टा सुबह शाम ज़रूर करें।
इसके बाद भोजन में चावल कुछ दिन बिल्कुल बन्द कर दें।
तीसरा भोजन में करेले की सब्जी अवश्य लें।
चौथा मेथी दाने 20 ग्राम की मात्रा में लेकर उसका पाउडर सुबह शाम खाली पेट ले अथवा भोजन से आधे घंटे पहले ले सिर्फ 10 दिनों में शुगर बिल्कुल नॉर्मल  स्थिति में आ जाएगी साथ ही कच्ची हल्दी का रस दिन में दो बार एक एक चम्मच लें।
साथ ही अपनी रेगुलर दवाएं भी लेते रहें.

तिल का तेल ... पृथ्वी का अमृत

*तिल का तेल ... पृथ्वी का अमृत*

यदि इस पृथ्वी पर उपलब्ध सर्वोत्तम खाद्य पदार्थों की बात की जाए तो तिल के तेल का नाम अवश्य आएगा और यही सर्वोत्तम पदार्थ बाजार में उपलब्ध नहीं है. और ना ही आने वाली पीढ़ियों को इसके गुण पता हैं.

🔹 क्योंकि नई पीढ़ी तो टी वी के इश्तिहार देख कर ही सारा सामान ख़रीदती है.
और तिल के तेल का प्रचार कंपनियाँ इसलिए नहीं करती क्योंकि इसके गुण जान लेने के बाद आप उन द्वारा बेचा जाने वाला तरल चिकना पदार्थ जिसे वह तेल कहते हैं लेना बंद कर देंगे.

🔹तिल के तेल में इतनी ताकत होती है कि यह पत्थर को भी चीर देता है. प्रयोग करके देखें....
🔹आप पर्वत का पत्थर लिजिए और उसमे कटोरी के जैसा खडडा बना लिजिए, उसमे पानी, दुध, धी या तेजाब संसार में कोई सा भी कैमिकल, ऐसिड डाल दीजिए, पत्थर में वैसा की वैसा ही रहेगा, कही नहीं जायेगा...
🔹लेकिन... अगर आप ने उस कटोरी नुमा पत्थर में तिल का तेल डाल दीजिए, उस खड्डे में भर दिजिये.. 2 दिन बाद आप देखेंगे कि, तिल का तेल... पत्थर के अन्दर भी प्रवेश करके, पत्थर के नीचे आ जायेगा. यह होती है तेल की ताकत, इस तेल की मालिश करने से हड्डियों को पार करता हुआ, हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है.

🔹 तिल के तेल के अन्दर फास्फोरस होता है जो कि हड्डियों की मजबूती का अहम भूमिका अदा करता है.

🔹और तिल का तेल ऐसी वस्तु है जो अगर कोई भी भारतीय चाहे तो थोड़ी सी मेहनत के बाद आसानी से प्राप्त कर सकता है. तब उसे किसी भी कंपनी का तेल खरीदने की आवश्यकता ही नही होगी.

🔹तिल खरीद लीजिए और किसी भी तेल निकालने वाले से उनका तेल निकलवा लीजिए. लेकिन सावधान तिल का तेल सिर्फ कच्ची घाणी (लकडी की बनी हुई) का ही प्रयोग करना चाहिए.
🔷तैल शब्द की व्युत्पत्ति तिल शब्द से ही हुई है। जो तिल से निकलता वह है तैल। अर्थात तेल का असली अर्थ ही है "तिल का तेल".
🔹तिल के तेल का सबसे बड़ा गुण यह है की यह शरीर के लिए आयुषधि का काम करता है.. चाहे आपको कोई भी रोग हो यह उससे लड़ने की क्षमता शरीर में विकसित करना आरंभ कर देता है. यह गुण इस पृथ्वी के अन्य किसी खाद्य पदार्थ में नहीं पाया जाता.
🔹सौ ग्राम सफेद तिल 1000 मिलीग्राम कैल्शियम प्राप्त होता हैं। बादाम की अपेक्षा तिल में छः गुना से भी अधिक कैल्शियम है।
काले और लाल तिल में लौह तत्वों की भरपूर मात्रा होती है जो रक्तअल्पता के इलाज़ में कारगर साबित होती है।
🔷तिल में उपस्थित लेसिथिन नामक रसायन कोलेस्ट्रोल के बहाव को रक्त नलिकाओं में बनाए रखने में मददगार होता है।
तिल के तेल में प्राकृतिक रूप में उपस्थित सिस्मोल एक ऐसा एंटी-ऑक्सीडेंट है जो इसे ऊँचे तापमान पर भी बहुत जल्दी खराब नहीं होने देता। आयुर्वेद चरक संहित में इसे पकाने के लिए सबसे अच्छा तेल माना गया है।

🔷तिल में विटामिन  सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है।
इसमें मीथोनाइन और ट्रायप्टोफन नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते।

🔹ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है।

🔷तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है।
यह कब्ज भी नहीं होने देता।
तिलबीजों में उपस्थित पौष्टिक तत्व,जैसे-कैल्शियम और आयरन त्वचा को कांतिमय बनाए रखते हैं।

🔷तिल में न्यूनतम सैचुरेटेड फैट होते हैं इसलिए इससे बने खाद्य पदार्थ उच्च रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।
सीधा अर्थ यह है की यदि आप नियमित रूप से स्वयं द्वारा निकलवाए हुए शुद्ध तिल के तेल का सेवन करते हैं तो आप के बीमार होने की संभावना ही ना के बराबर रह जाएगी.

🔹 जब शरीर बीमार ही नही होगा तो उपचार की भी आवश्यकता नही होगी. यही तो आयुर्वेद है.. आयुर्वेद का मूल सीधांत यही है की उचित आहार विहार से ही शरीर को स्वस्थ रखिए ताकि शरीर को आयुषधि की आवश्यकता ही ना पड़े.

🔹एक बात का ध्यान अवश्य रखिएगा की बाजार में कुछ लोग तिल के तेल के नाम पर अन्य कोई तेल बेच रहे हैं.. जिसकी पहचान करना मुश्किल होगा. ऐसे में अपने सामने निकाले हुए तेल का ही भरोसा करें. यह काम थोड़ा सा मुश्किल ज़रूर है किंतु पहली बार की मेहनत के प्रयास स्वरूप यह शुद्ध तेल आपकी पहुँच में हो जाएगा. जब चाहें जाएँ और तेल निकलवा कर ले आएँ.

🔷तिल में मोनो-सैचुरेटेड फैटी एसिड (mono-unsaturated fatty acid) होता है जो शरीर से बैड कोलेस्ट्रोल को कम करके गुड कोलेस्ट्रोल यानि एच.डी.एल. (HDL) को बढ़ाने में मदद करता है। यह हृदय रोग, दिल का दौरा और धमनीकलाकाठिन्य (atherosclerosis) के संभावना को कम करता है।
कैंसर से सुरक्षा प्रदान करता है-
तिल में सेसमीन (sesamin) नाम का एन्टीऑक्सिडेंट (antioxidant) होता है जो कैंसर के कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ है और उसके जीवित रहने वाले रसायन के उत्पादन को भी रोकने में मदद करता है।

🔹 यह फेफड़ों का कैंसर, पेट के कैंसर, ल्यूकेमिया, प्रोस्टेट कैंसर, स्तन कैंसर और अग्नाशय के कैंसर के प्रभाव को कम करने में बहुत मदद करता है।
तनाव को कम करता है-

🔹इसमें नियासिन (niacin) नाम का विटामिन होता है जो तनाव और अवसाद को कम करने में मदद करता है।
हृदय के मांसपेशियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

🔹तिल में ज़रूरी मिनरल जैसे कैल्सियम, आयरन, मैग्नेशियम, जिन्क, और सेलेनियम होता है जो हृदय के मांसपेशियों को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और हृदय को नियमित अंतराल में धड़कने में मदद करता है।

🔹शिशु के हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है-
तिल में डायटरी प्रोटीन और एमिनो एसिड होता है जो बच्चों के हड्डियों के विकसित होने में और मजबूती प्रदान करने में मदद करता है।

🔹उदाहरणस्वरूप 100ग्राम तिल में लगभग 18 ग्राम प्रोटीन होता है, जो बच्चों के विकास के लिए बहुत ज़रूरी होता है।
गर्भवती महिला और भ्रूण (foetus) को स्वस्थ रखने में मदद करता है-

🔹तिल में फोलिक एसिड होता है जो गर्भवती महिला और भ्रूण के विकास और स्वस्थ रखने में मदद करता है।

 🔹शिशुओं के लिए तेल मालिश के रूप में काम करता है-

🔹अध्ययन के अनुसार तिल के तेल से शिशुओं को मालिश करने पर उनकी मांसपेशियाँ सख्त होती है साथ ही उनका अच्छा विकास होता है।

🔹 आयुर्वेद के अनुसार इस तेल से मालिश करने पर शिशु आराम से सोते हैं।
अस्थि-सुषिरता (osteoporosis) से लड़ने में मदद करता है-

🔹तिल में जिन्क और कैल्सियम होता है जो अस्थि-सुषिरता से संभावना को कम करने में मदद करता है।

🔹मधुमेह के दवाईयों को प्रभावकारी बनाता है-

🔹डिपार्टमेंट ऑफ बायोथेक्सनॉलॉजी विनायक मिशन यूनवर्सिटी, तमिलनाडु (Department of Biothechnology at the Vinayaka Missions University, Tamil Nadu) के अध्ययन के अनुसार यह उच्च रक्तचाप को कम करने के साथ-साथ इसका एन्टी ग्लिसेमिक प्रभाव रक्त में ग्लूकोज़ के स्तर को 36% कम करने में मदद करता है जब यह मधुमेह विरोधी दवा ग्लिबेक्लेमाइड (glibenclamide) से मिलकर काम करता है। इसलिए टाइप-2 मधुमेह (type 2 diabetic) रोगी के लिए यह मददगार साबित होता है।

🔹दूध के तुलना में तिल में तीन गुना कैल्शियम रहता है। इसमें कैल्शियम, विटामिन बी और ई, आयरन और ज़िंक, प्रोटीन की भरपूर मात्रा रहती है और कोलेस्टरोल बिल्कुल नहीं रहता है।

🔹तिल का तेल ऐसा तेल है, जो सालों तक खराब नहीं होता है, यहाँ तक कि गर्मी के दिनों में भी वैसा की वैसा ही रहता है.
तिल का तेल कोई साधारण तेल नहीं है। इसकी मालिश से शरीर काफी आराम मिलता है। यहां तक कि लकवा जैसे रोगों तक को ठीक करने की क्षमता रखता है।

🔹इससे अगर  महिलाएं अपने स्तन के नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें, तो स्तन पुष्ट होते हैं। सर्दी के मौसम में इस तेल से शरीर की मालिश करें, तो  ठंड का एहसास नहीं होता।
🔹 इससे चेहरे की मालिश भी कर सकते हैं। चेहरे की सुंदरता एवं कोमलता बनाये रखेगा। यह सूखी त्वचा के लिए उपयोगी है।

🔹तिल का तेल- तिल विटामिन ए व ई से भरपूर होता है। इस कारण इसका तेल भी इतना ही महत्व रखता है। इसे हल्का गरम कर त्वचा पर मालिश करने से निखार आता है। अगर बालों में लगाते हैं, तो बालों में निखार आता है, लंबे होते हैं।

🔹जोड़ों का दर्द हो, तो तिल के तेल में थोड़ी सी सोंठ पावडर, एक चुटकी हींग पावडर डाल कर गर्म कर मालिश करें। तिल का तेल खाने में भी उतना ही पौष्टिक है विशेषकर पुरुषों के लिए।इससे मर्दानगी की ताकत मिलती है!

🔹हमारे धर्म में भी तिल के बिना कोई कार्य सिद्ध नहीं होता है, जन्म, मरण, परण, यज्ञ, जप, तप, पित्र, पूजन आदि में तिल और तिल का तेल के बिना संभव नहीं है अतः इस पृथ्वी के अमृत को अपनावे और जीवन निरोग बनावे।

घुटनों के दर्द को अब भगाये चुटकियो में, जानिए रामबाण इलाज

*_घुटनों के दर्द को अब भगाये चुटकियो में, जानिए रामबाण इलाज_*

*यह प्रयोग केवल घुटनों का दर्द जिनके घुटनों की ग्रीस खत्म हो गयी हो सूजन हो या कार्टिलेज घीस गये हो या घुटनों को बदलने की सलाह दी जा रही है तो एक बार यह प्रयोग अवश्य अजमाये आप को निराश नही होना पड़ेगा।*


*यह पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करके हर एक घुटनों के दर्द से पीडित व्यक्ति तक जरूर पहुचाये*

*उपचार हेतु आवश्यक सामग्री*

*(1) सहजन बीज 150 ग्राम*

*(2) निर्गुणडी 100 ग्राम*

*(3) अलसी 100 ग्राम*

*(4) सौठ 50 ग्राम*

*(5) छोटी पीपल 50 ग्राम*

*(6) लौंग 25 ग्राम*

*(7) काली मिर्च 25 ग्राम*



*ये सात प्रकार की औषधि लाकर कूट पीस कर बारीक पाउडर बना ले ओर रोजाना एक चम्मच यानी पाच सात ग्राम पाउडर सुबह उठते ही खाली पेट एक गिलास गुनगुने पानी से ऐसे ही रात को सोते समय लिजिये ओर एक महिना बाद प्रकृति का कमाल देखिए आपको घुटने बदलवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी*

*धन्यवाद!!*

छपाकि, शीत पित्ती ,पित्ती उछलना

*छपाकि, शीत पित्ती ,पित्ती उछलना*

नागकेसर जो की पंसारी  के यहां  मिल जाती है , का चूर्ण बना लें। इस आधा चम्मच चूर्ण  को एक चम्मच शहद में मिलाकर सुबह-शाम 15 से 20 दिन तक खिलाएं पुरानी से पुरानी शीत जड़  से समाप्त हो जाएगी लेकिन इसके साथ में परहेज बहुत जरूरी है पहली बार पेट को साफ रखें यदि बदहजमी हो तो आधा लीटर  गर्म  पानी में 6 ग्राम नमक डालकर उल्टी कर ले ।यदि कब्ज हो तो जुलाब ले ।
 *परहेज* बैगन गुड़  तेल खटाई लाल मिर्च अचार मछली और गोश्त ना खाएं ।

दाँतों मे दर्द, मसूड़ों मे दर्द अथवा सूजन की समस्या

दाँतों मे दर्द, मसूड़ों मे दर्द अथवा सूजन की समस्या से राहत पाने के लिए आप एक गिलास पानी मे तीन से चार अमरुद के पत्ते उबाल ले, ठंडा होने  दें, ज़ब पानी गुनगुना रह  जाए, तो इसे छान ले, तथा नमक मिलाकर कुल्ले करें,, आपका ज़रूर लाभ होगा।

गुर्दे की पथरी के उपाय

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*👨🏻‍🦱👉🏿गुर्दे की पथरी के उपाय👈🏿👩🏻*



🌹👉🏿गुर्दे की पथरी में कुल्थी का उपयोग रामबाण सिद्ध होता है। 250 ग्राम कुल्थी को 3 लीटर पानी में रात भर के लिए भिगो दे। सुबह इस पानी को आंच पर चढ़ा दे , जब पानी आधा रह जाए तब इसे निचे उतार कर ठंडा कर ले। अब 50 ग्राम गाय के देशी घी का इसमें छोंकन लगाये। छोंक में जायके के लिए सेंधा नमक , हल्दी , जीरा और काली मिर्च अल्प मात्रा में दाल सकते है। इस तैयार औषधि का उपयोग 250 ग्राम से 500 ग्राम की मात्रा में कर सकते है। इसका इस्तेमाल 1 से 2 सप्ताह तक लगातार करने से गुर्दे की कैसी भी पथरी हो गल कर निकल जायेगी।

👉🏿250 ग्राम गाय के मट्ठे में 6 ग्राम जवाखार डालकर रोगी को सुबह शाम पिलाने से गुर्दे की पत्थरी के कारण होने वाले दर्द से छुटकारा मिलता है।

 👉🏿10 ग्राम इलायची के दाने , 10 ग्राम शिलाजीत एवं 6 ग्राम पीपल – इन सभी को बारीक़ पीसले । तैयार चूर्ण में 25 ग्राम की मात्रा में पीसी हुई मिश्री मिलाएं। इस चूर्ण का इस्तेमाल 1 – 1 चम्मच की मात्रा में सुबह – शाम करने से जल्द ही गुर्दे की पत्थरी से निजात मिलती है।

👉🏿गुर्दे की पत्थरी में मुली के बीज भी काफी फायदेमंद होते है। दो गिलास पानी में 30 ग्राम मुली के बीज डालकर आग पर अच्छी तरह उबाले । जब एक गिलास पानी बचे तो इसे छानकर दिन में दो बार सेवन करे।यह प्रयोग भी गुर्दे की पत्थरी में काफी लाभ देता है।

👉🏿 गुर्दे की पत्थरी से होने वाले दर्द से बचने के लिए👈🏿* काले लोहे की अंगूठी अपने सीधे हाथ की मध्यमा अंगुली में पहने ।इससे गुर्दे की पत्थरी का दर्द कम होता है ।दरश्ल मध्यमा अंगुली का दबाव बिंदु गुर्दे से संबंधित होता है ।इसलिए अंगूठी पहनने से गुर्दे की पत्थरी के कारण होने वाले दर्द में आराम मिलेगा।

👉🏿पालक का रस एक कप एवं नारियल का पानी एक कप दोनो को मिलाकर नित्य 15 दिनों तक सेवन करने से गुर्दे की पत्थरी गल कर बाहर निकल जाती है।

👉🏿गाजर के बीज और शलजम के बीज – दोनों को 3 – 3 ग्राम की मात्रा में लेकर  एक मुली को अन्दर से खोखला कर के इसमें भर दे ।इस मुली का मुंह गाजर की छीलन से भर दे और इसे उपलों की आग में दबा दे । जब मुली भुन जाए तब इसे उपलों की आग से बाहर निकाल कर इसमें से बीज निकाल ले। बीजो को 2 – 2 ग्राम की मात्रा में सुबह – शाम सेवन करने से मूत्र की वर्द्धि होगी एवं पत्थरी भी गल कर बाहर निकल जायेगी।

👉🏿 गोखरू का चूर्ण 10 की मात्रा में 25 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से भी गुर्दे की पथरी में आराम मिलता है।इसके साथ में प्याज का 4 चम्मच रस सुबह और शाम पीना काफी फायदेमंद साबित होता है।

👉🏿गुर्दे की पत्थरी में पथ्य और अपथ्य आहार👈🏿* जिस व्यक्ति को गुर्दे की पत्थरी हो उसे शीघ्र पचने वाले आहार ग्रहण करने चाहिए । गेंहू और जौ की रोटी , हरी सब्जियां, मुंग की दाल , मौसमी फल और इसका रस , जौ और नारियल का पानी का सेवन करना चाहिए।इसके आलावा पुराने चावल , मुली , गाजर , अदरक , दूध , मट्ठा ,  दही और निम्बू का रस भी पथरी के रोगी के लिए काफी लाभदायक सिद्ध होता है.अधिक पानी का सेवन करे ताकि मूत्र के आने की परवर्ती बढे और पथरी जल्दी ही बाहर निकले।

👉🏿सावधानी👈🏿*  मीठा , मक्खन , घी , तेल , चीनी , शराब , मांस , चाय , कोफ़ी और नशीले पदार्थो का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।क्योकि इनके इस्तेमाल से पत्थरी और अधिक सख्त बनती है।

एलर्जी नाशक का देशी नुस्खा

एलर्जी नाशक का देशी नुस्खा

250 ग्राम  गुड
अदरक 25 ग्राम
 हल्दी 15 ग्राम
 काली मिर्च पांच  दाने


 *विधि*
 सबसे पहले हल्दी और काली मिर्च को अलग-अलग पीस लें। अदरक को  बारीक किस लें फिर सब को गुड़ में मिलाकर अग्नि पर पकाएं ।
जब अवलेह  जैसा  बन जाए अर्थात गाढा हो जाए तब उतार ले। प्रतिदिन एक-एक चम्मच तीन बार खिलाएं 1 या 2 दिन में एलर्जी का प्रभाव से समाप्त हो जाएगा।

Sunday, 19 January 2020

मूली खाने से फायदे - सर्दीयों मे मूली अमृत है

मूली खाने से फायदे - सर्दीयों मे मूली अमृत है
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1. रोजाना सुबह खाने में मूली का सेवन करने से डायबिटीज से जल्द छुटकारा मिल सकता हैं.

2. मूली खाने से जुखाम रोग भी नही होता हैं, इसीलिए मुली को स्लाद के रूप में जरूर खाना चाहिए.

3. हर-रोज मूली के ऊपर काला नमक डालकर खाने से भूख न लगने की समस्या दूर हो जाती हैं.

4. मूली खाने से हमे विटामिन ए मिलता हैं, जिससे हमारे दांतो को  मजबूती मिलती हैं.

5. मूली खाने से बाल झड़ने की समस्या दूर हो जाती हैं.

6. बवासीर रोग में कच्ची मूली या मूली के पत्तो की सब्जी बनाकर खाना फायदेमंद होता हैं.

7. अगर पेशाब का बनना बंद हो जाये तो मूली का रस पीने से पेशाब दोबारा बनने लगता हैं.

8. हर-रोज 1 कच्ची मूली सुबह उठते ही खाने से पीलीया रोग में आराम मिलता हैं.

9. नियमित रूप से मूली खाने से मधुमेह का खतरा भी कम रहता हैं.

10. अगर आपको भी खट्टी डकारे आती हैं, (अम्लपित) तो मूली के 1 कप रस में मिश्री मिलाकर पीने से लाभ मिलता हैं.

11. नियमित रूप से मूली खाने से मुँह,आंत और किडनी की कैंसर का खतरा कम रहता हैं.

12. थकान मिटाने और नींद लाने में भी मूली सहायक हैं.

13. मोटापा दूर करने के लिए मूली के रस में नींबू और कम मात्रा में नमक मिलाकर सेवन करें.

14. पायरिया से परेशान लोग मूली के रस से दिन में 2-3 बार कुल्ले करें और इसका रस पिएं.

15. सुबह-शाम मूली का रस पीने से पुराने कब्ज में भी लाभ होता हैं.

16. मूली के रस में समान मात्रा में अनार का रस मिलाकर पीने से हीमोग्लोबिन बढ़ता हैं.

17. मूली को धीरे-धीरे चबाकर खाने से दांत चमकते हैं, और शरीर से दाग-धब्बे भी दूर हटते हैं.

18. मूली खाने से हमारी आंखों की रोशनी भी बढ़ती हैं.

19. नियमित रूप से मूली खाने से ब्लड प्रैशर कंट्रोल में रहता हैं.

20. मूली खाने का सबसे बडा फायदा पेट में गैस तो बिल्कुल नही रहती हैं.

21. हाथ-पैरों के नाख़ूनों का रंग सफ़ेद हो जाए तो मूली के पत्तों का रस पीना लाभदायक हैं.

22. सुबह-सुबह मूली के नरम पत्तों पर सेंधा नमक लगाकर खाने से मुंह की दुर्गंध दूर होती हैं.

23. मूली के पत्तों में सोडियम होता है, जो हमारे शरीर में नमक की कमी को पूरा करता हैं.

24. नियमित रूप से मूली खाने से पेट के कीडे नष्ट हो जाते हैं
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